Monday, 13 August 2012

स्वतंत्रता दिवस..


मैं आज़ाद भारत की जनता
बेबस ,लाचार, लुटी -पिटी ,
जानवरों की तरह रहने
की आदी......
यह शब्द सुनने मुझे अच्छे
नहीं लगते ....
क्यूँ कि वे सारे ही गुण
मुझ में नहीं है ............
हाँ मैं सहनशील जरुर हूँ ,
पर कमजोर नहीं ...
मुझे मेरे वीरो पर गर्व है ,
मैं उन ज्ञात - अज्ञात
वीरो को भूली नहीं हूँ ,
जो शहादत की राह चले
गए ......
अब मैं सिर्फ भूत मैं ही नहीं
जीती ना इतराती ....
अब मैं वर्तमान में रह कर
भविष्य पर नज़र रखती हूँ ......
गलत के विरूद्ध आवाज़ 
भी उठाती हूँ ..
हाँ , मैं  कुछ समय के लिए
भ्रमित जरुर हुई  थी,
पर भटकी नहीं......
मुझे गर्व होता है कि मैं
भारत देश का हिस्सा
हूँ ..........
स्वतंत्रता दिवस पर मैं
धरती माँ के उन सपूतों
को नमन करती हूँ जिनके
कारण आज हम आज़ाद
है........