Saturday, 5 May 2012

उसका इंतज़ार

सुबह-सवेरे ही जब उसका

ख़याल आता है तो मुख 


पर मुस्कान और डर 


एक साथ आ जाता है .

....
मुस्कान उसके आने के लिए 


और डर उसके इंतजार के लिए ..


हर आहट में चौंक जाती हूँ ,

आँखे दरवाजे पर बिछाये बैठी

रहती हूँ उसके दीदार की चाहत में ...


कभी कड़ी धूप में भी सूनी राह


ताकते हुए उसका इंतज़ार करती


रहती हूँ ..


......
इंतज़ार की घड़ियाँ जब खत्म होती


है और उसकी एक झलक दिख जाती


तो मेरा मन करता है उसको पूजा की


थाली दिखाऊं या फूलो का हार पहनाऊं ,


पर मैं तो झाड़ू ही उठा लाती हूँ


और उसको पकड़ाते हुए,जैसे मुहं में


जैसे मिश्री घुली हुई हो ,बोल पड़ती हूँ


जा जल्दी से झाड़ू लगा ,मैं कडक सी


चाय बनाती  हूँ तेरे लिए ......