Tuesday, 12 July 2016

मैं क्यों बताऊँ तुम्हें...

क्या तुम जानते हो ,
लिखने में
जो स्याही
लगती है,
वह कहाँ से आती है !

तुम नहीं जानते,
 शायद
या
जानते तो हो
लेकिन
जानना नहीं  चाहते !

 मैं क्यों
बताऊँ तुम्हें फिर !




6 comments:

  1. शुभ प्रभात दी.....
    दुविधा
    एक प्यारी सी
    ...
    तुम नहीं जानते,
    शायद
    या
    जानते तो हो
    लेकिन
    जानना नहीं चाहते !
    ...
    सादर

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  2. जानते सब हैं पर शायद समझना नहीं चाहते ...

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14-07-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2403 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 18 जुलाई 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  5. बहुत सुन्दर

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  6. बहुत सुन्दर...

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