Wednesday, 20 May 2015

कैसा है मानव जो बना है दानव..

नभ है उदास क्यूँ ,
क्यूँ उदास है
देवी -देवता ,
चुप  हैं दीप
बुझी क्यूं दीपमाला।

सोचे हैं सभी
क्या सोच के यह धरा बनाई ,
धरा तो बनाई
ये प्राणी  क्यूं बनाये।

प्राणी तो बनाये ,
फिर मानव को
सर्वश्रेष्ठ क्यों बनाया।

बन सर्वश्रेष्ठ मानव
भूला मानवता ही ,
हृदय पाषाण बनाया।

बना पाषाण सा
पूजता भी पाषाण को
कैसा है मानव 
जो बना है दानव। 
अब यही सोचे हो उदास
देवी -देवता।