Saturday, 19 April 2014

तुम अब कहीं नहीं

तुमने पूछा
तुम कहाँ हो !
तुम अब कहीं नहीं। 

तुम्हें भूले हुए
एक अर्सा हुआ
अब कोई याद बाकी नहीं। 

तुम्हें तो मैंने 
उसी वर्ष भुला दिया था 
जिसमे तेरहवां महीना था। 

जब फरवरी में 
तीसवीं तारीख आई थी। 

जिस वर्ष 
तीन सौ पैंसठ की बजाय 
तीन सौ सड़सठ दिन थे। 

फिर भी पूछते हो कि 
तुम कहाँ हो ?