Monday, 24 August 2015

तुम मुस्कुराओगे नहीं तो...

तुम चुप रहोगे
 तो क्या
बादल बारिश नहीं लाएगा
फिर तो
आसमान सूना ही
रहेगा शायद।

तुम बोलोगे नहीं
तो क्या
चिड़ियाँ सुर भूल जाएगी
फिर तो
बगिया सूनी ही रहेगी शायद।

तुम मुस्कुराओगे नहीं
तो क्या
सूरज दिन नहीं लाएगा
फिर तो
मेरे मन में अँधियारा ही रहेगा
यकीनन !