Tuesday, 4 December 2012

कुछ तैयारियां ...

पुरानी किताबें सहेजते 
अटक गयी नज़रे 
दिख गयी वही लाल -डायरी 
जिसमे लिखा था मैंने 
मुझी पर की गयी 
शिकायते ,
लानते ,
कुछ उलाहने 
मेरे पिता की मजबूरियों ,
मेरे निकम्मेपन पर 
की गयी टीका - टिप्पणियां ..
आज उन सबकी
समीक्षा कर डाली गयी
सभी बातों को
जहन में नोट कर लिया गया ...
जवान होते बेटे को देख
कुछ तैयारियां
मैंने भी कर डाली ...