Saturday, 3 November 2018

एक पहचानी सी महक है..

आज किसी के  आने की आहट सी है ,
मन जरा सा बैचन भी और उत्सुक भी है ..

जाने गुलाब खिलेगा या जूही का फूल ,
हवाओं में एक पहचानी महक सी है ...

4 comments:

  1. https://bulletinofblog.blogspot.com/2018/11/blog-post_3.html

    ReplyDelete
  2. वाह, बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (05-11-2018) को "धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-3146) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    ReplyDelete