Tuesday, 11 June 2019

तुम्हारे नाम की है एक रेखा

हाथ में लकीरें है
कितनी सारी
छोटी-बड़ी,
बारीक,
बारीक से भी महीन !

जीवन रेखा
दिल की रेखा
दिमाग की रेखा
और
किस्मत वाली रेखा भी !

एक रेखा भी है
तुम्हारे नाम की |

जो उँगलियों के पोरवों से
फिसलती हुई
जीवन रेखा
दिल की रेखा
दिमाग की रेखा
और
किस्मत की रेखा से
मणिबन्ध में
आकर रूकी है |

थामे रहती है
कलाई मेरी
धड़कती है मेरे हर
ह्रदय के स्पंदन में |

जीती हूँ हर पल तुम्हें
हर धड़कते स्पंदन में
तुम्हारे होने का अहसास में |

Sunday, 19 May 2019

वह नहीं गया ,रह गया था

जाने वाले ने तो कहा था
नहीं रुक पायेगा
उसे अब जाना ही होगा..

अब अगर रुक गया
जा  नहीं पाएगा
फिर कभी..

शाम भी हो रही थी
जाना ही होगा उसे
अँधेरा गहराने से पहले ही..

जाने वाले को विदा तो दे दी थी
मुड़ कर देखा भी न था
फिर क्या हुआ था !

वह क्यों रुका
थोड़ा सा ठिठक भी गया था
जाने से पहले !

उसे मुड़ कर तो नहीं देखा गया था
फिर भी
कदमों की 
थमी-ठहरी
पदचाप बता गई

वह नहीं गया 
रह गया था
बस गया था
थोड़ा-थोड़ा हर जगह..

यहाँ -वहां
हर कोने में
छत की मुंडेर पर भी
और
ह्रदय के तिकोने वाले हिस्से में भी।







Sunday, 17 February 2019

अब तुम ही बतालओ

सुनो
आज सपने में देखा
जा रही हूँ
मैं
एक लम्बी सड़क पर
नीम अंधेरा है..

सड़क पर
एक हरा ,ताजा
टहनी से टूटा हुआ
बड़ा सा लट्ठ..

अंधेरे से डरने वाली को
सहारा है यह लट्ठ..

दूर - लम्बी सड़क पर
खड्डा नजर आता है
और
खड्डे में है पानी भरा..

खड़ी रहती हूँ
मैं
किन्कर्तव्यमूढ़ सी ..

लगा था मुझे
यह सड़क
जरिया होगी
सपने में ही सही,
तुमसे मिलने की..

अब तुम ही
बतलाओ जरा
सपने को बूझो जरा
तुम तक आऊँ तो कैसे भला !

Tuesday, 4 December 2018

छोटा ही है, उदासियों का कैनवास..


बना लीजिये
 कैनवास ,
उदासियों की चादर को।

जेबों में भरे
चमकीले रंगो से
सजा दीजिये
उस पर
चाँद और तारे।

निहारिये
उस पर
चांदनी में नहाये
ऊँचे पहाड़
और
कल-कल बहती नदियाँ।

उकेरिये 
आशाओं के
उम्मीदों के
सप्तऋषि ,
ग्रह -नक्षत्र भी।

छोटा ही है 
उदासियों का कैनवास,
जैसे कोई
 काली रात !

जरा सी देर और निहारिये ,
भोर का तारा
खुद ही टिमटिमाएगा,
खुद ही सज जायेगा
मन के रंगो से
सूरज की लालिमा से
बिना उकेरे ही।


 

Saturday, 3 November 2018

एक पहचानी सी महक है..

आज किसी के  आने की आहट सी है ,
मन जरा सा बैचन भी और उत्सुक भी है ..

जाने गुलाब खिलेगा या जूही का फूल ,
हवाओं में एक पहचानी महक सी है ...

Tuesday, 30 October 2018

अलाव तो जलाओ

सर्द मौसम
या सर्द होते रिश्ते
जमता लहू
अलाव तो जलाओ
प्रेम व विश्वास का

प्यारी बिटिया

रूप सुहाना
मधुर है मुस्कान
प्यारी बिटिया
आँगन की रौनक
कलेजे की ठंडक