Tuesday, 20 September 2022

सुना है तुम चाँद पर रहने लगे हो..

सुना है तुम
चाँद पर रहने लगे हो

तो क्या हुआ फिर
चाँद अगर दूर है 

वह दूर तो है
दूसरों के लिए ही
मेरे लिए नहीं

छत पर
थाली में उतारूँगी चाँद को
पूनम की रात को
तुम भी मिलने चले आना.. 


Wednesday, 12 January 2022

अगर मान सको तो..

जब भी तुम
कुछ सोचते हुए गुम हुए हो, 
उभरता है
ख्यालों के मध्य बिन्दु के पास
चमकता जो चंद्र बिन्दु 
वह मैं नहीं हूँ.. 
 
चंद्र बिन्दु जहाँ है
वहीं अच्छा है
मैं माथे की बिंदिया सी
ख्यालों का चंद्रबिंदु क्यूँ बनूं.. 

तुम्हें
तुम्हारे आस- पास जो
महकी सी हवा महसूस होती है
वही  हूँ मैं
अगर मान सको तो..

 


Thursday, 17 June 2021

तुमने कहा था

तुमने कहा था
एक दिन
मुझे अपने दिल में 
 रखना
अगर न रख सको
जीवन की तंग, 
संकरी गलियों में... 

क्या तुम ज्योतिषी हो
या
हो भविष्य वक्ता , 
तुम्हारा स्थान 
सच में ही है 
दिल के तिकोने वाले
हिस्से में.. 

कितना अच्छा हुआ न
तुमने जो चाहा था
वही मिल गया... 

जीवन की तंग,
अकेलेपन की संकरी गली
मुझे मुबारक .. 



Friday, 16 April 2021

वह बन बैठा है रब जैसा

कोई है 

जो है 

अपना सा 

मगर 

है वह 

अनजाना सा ...

हर रोज 

पाती लिखी जाती है

उसे  ...


हर रोज

दुआ में हाथ उठते हैं 

 सलामती की 

 होती है 

एक दुआ 

उसके नाम की भी 


मगर 

जाना-अनजाना 

बेखबर है 

मगन है 

कहीं दूर 

बहुत ही दूर ...


थोड़ा बहरा भी है 

शायद 

नहीं सुनती 

उसे  

मंदिर की घंटियां

ह्रदय की पुकार ही ...


वह बन बैठा है 

रब जैसा ,

शायद 

नहीं यकीनन ही 

बन बैठा है 

रब जैसा ही ...


रब 

जैसे ही वह 

दिखाई देता है 

मगर 

सुनाई नहीं देता ,

सुनवाई भी नहीं करता !



 

Tuesday, 5 May 2020

मैं खामोश हूँ

सब खामोश हैं 
मैं , यह दरख्त ,
मेरी तन्हाई भी ...

मैं खामोश तो हूँ ,
लेकिन 
अंतर्मन में एक शोर 
मचा है ...

मचा है 
एक कोलाहल सा ,
सुनता कौन इसे लेकिन 
दबाए खड़ा हूँ मौन ...

मौन तो यह दरख्त 
भी नहीं 
बस खड़ा है ना जाने कितने 
कोलाहल 
बसाये अपने भीतर 
मुझ जैसों का मौन ...
(चित्र गूगल से साभार)

Tuesday, 24 September 2019

मत देखो नीचे

उड़ने की ठानी ही है तो
उड़ जाओ

पर फैलाओ
टिका दो
आँखे आसमान पर

मत देखो
नीचे
धरा  को

मत सोचो
धरा  के
गुरुत्वाकर्षण को

टिकेंगे जितने
तुम्हारे पैर
उतनी ही मिलेगी
 तुम्हें यह धरा

 नहीं है ये धरा
तुम्हारे रहने के लिए
तुम हो सिर्फ
आसमान की ऊंचाइयों  लिए

तलाश करो
अपने लिए
अपना एक नया आसमान

जहाँ हो,
तुम्हारे अपने ही
ग्रह -नक्षत्र
अपना ही एक सूरज
और और चाँद भी !

वहाँ
न चाँद को लगे ग्रहण
न ही सूरज को !

एक अपना
अलग ही ब्रह्माण्ड बना लो
जो हो तुम्हारा अपना ,
सिर्फ तुम्हारा !



Friday, 2 August 2019

ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਹੀ ਕਰਦੀ...

ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੈੰਨੂੰ ਯਾਦ
ਨਹੀ ਕਰਦੀ
ਯਾਦ ਤਾਂ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਕਦੇ ਵੀ
ਨਹੀ ਕੀਤਾ ...

ਯਾਦ ਕਿਵੇਂ ਕਰਦੀ ਤੈਨੂੰ
ਤੂ ਹੀ ਬਤਾ ਮੈਨੂੰ ,
ਪਹਿਲਾਂ ਤਾਂ ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ
ਤੇਰੇ ਭੁਲ ਜਾਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ
ਹੀ ਦਸ ਜਾ ...

ਜਦੋਂ ਤੈਨੂੰ ਭੁਲ ਜਾਵਾਂਗੀ
ਉਸ ਦਿਨ ਤੋਂ
ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨ ਲੱਗਾਂਗੀ
ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਹੀ ਕਰਦੀ ...