आपकी कविता ने मुझे रुककर सोचने पर मजबूर कर दिया। उंगलियों, पोरों और इंतज़ार को जोड़ने का तरीका बहुत अलग और प्रभावशाली लगा। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com धन्यवाद!
बहुत सुंदर भाव
ReplyDeleteबढ़िया!!!
ReplyDeleteरेणु जी बहुत शुक्रिया
Deleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत शुक्रिया
Deleteबहुत शुक्रिया
ReplyDeleteअनूठी कल्पना
ReplyDeleteसुंदर सृजन!
ReplyDeleteगहन
ReplyDeleteआपकी कविता ने मुझे रुककर सोचने पर मजबूर कर दिया। उंगलियों, पोरों और इंतज़ार को जोड़ने का तरीका बहुत अलग और प्रभावशाली लगा। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
ReplyDeleteअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
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