यह जीवन
हर दिन आस भरा
उम्मीद भरा
भोर से साँझ तक।
हर रोज़ एक आस
उदित होती है
सूर्य के उदय के
साथ - साथ।
छाया सी डोलती
कभी आगे चलती है
कभी लगता है
दम तोड़ देगी
क़दमों तले
भरी दोपहर में।
नज़र आती है
हथेलियाँ खाली सी
लेकिन
दिन ढले
चुपके से दबे पाँव
पीछे से आ
कन्धों पर हाथ रख देती है।
रात्रि के घोर अँधेरे में ,
निद्रा में भी
आस
पलती है स्वप्न सी।
आस -उम्मीद से
भरा जीवन ही
देता है जीने की प्रेरणा।
हर दिन आस भरा
उम्मीद भरा
भोर से साँझ तक।
सूर्य के उदय के
साथ - साथ।
छाया सी डोलती
कभी आगे चलती है
कभी लगता है
दम तोड़ देगी
क़दमों तले
भरी दोपहर में।
नज़र आती है
हथेलियाँ खाली सी
लेकिन
दिन ढले
चुपके से दबे पाँव
पीछे से आ
कन्धों पर हाथ रख देती है।
रात्रि के घोर अँधेरे में ,
निद्रा में भी
आस
पलती है स्वप्न सी।
आस -उम्मीद से
भरा जीवन ही
देता है जीने की प्रेरणा।


