नाते -रिश्ते
जैसे
खड़ी दीवारें ,
तपती धूप में खड़ी
भीगती बारिश में ,
सर्द हवाओं के थपेड़े झेलती ...
नारी ही बांधती
बन कर
छत की तरह
सभी रिश्ते -नाते ...
सभी को समेट लेती
बचा लेती ,
तपती धूप
बरसती बारिश
सर्द हवाओं के थपेड़ों से ...
मजबूत छत
जैसी नारी
रिश्ते मिलते उसे
बर्फ की दीवारों से ...
बचाती -समेटती
नाते - रिश्तों को
नारी के हाथ क्या रहता
एक दिन
सिवाय
पिघली बर्फ के ...!
( चित्र गूगल से साभार )
जैसे
खड़ी दीवारें ,
तपती धूप में खड़ी
भीगती बारिश में ,
सर्द हवाओं के थपेड़े झेलती ...
नारी ही बांधती
बन कर
छत की तरह
सभी रिश्ते -नाते ...
सभी को समेट लेती
बचा लेती ,
तपती धूप
बरसती बारिश
सर्द हवाओं के थपेड़ों से ...
मजबूत छत
जैसी नारी
रिश्ते मिलते उसे
बर्फ की दीवारों से ...
बचाती -समेटती
नाते - रिश्तों को
नारी के हाथ क्या रहता
एक दिन
सिवाय
पिघली बर्फ के ...!
( चित्र गूगल से साभार )



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