नयी उड़ान +
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Sunday, 27 January 2013
यह पत्थर- पाषाण सी दुनिया........
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यह पत्थर- पाषाण सी दुनिया पत्थर की दीवारें-मकान यहाँ लोग क्यूँ -कर ना हो पत्थर -दिल .... कौन है मेरा यहाँ किसे कहूँ मैं अपना लहू...
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Friday, 25 January 2013
सरहद पर जब भी ........
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सरहद पर जब भी युद्ध का बिगुल बजता है मेरे हाथ प्रार्थना के लिए जुड़ जाते हैं दुआ के लिए भी उठ जाते हैं सीने पर क्रोस भी बनाने लग जात...
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Monday, 21 January 2013
ਮੇਰੀ ਪੁਕਾਰ ( मेरी पुकार )
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ਮੈਂ ਤੇੰਨੁ ਪੁਕਾਰਦੀ ਰਵਾਂਗੀ ........ ਪਰ ਕਦੋਂ ਤਕ ...! ਮੇਰੀ ਪੁਕਾਰ ਦਾ ਤੂੰ ਜਵਾਬ ਨਹੀ ਦਿੰਦਾ ਜਦੋਂ ਤਕ...! ਇਹ ਮੇੰਨੁ ਪਤਾ ਹੈ , ਮੈਂ ਜਾਣਦੀ ਵੀ ਹਾ...
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Sunday, 13 January 2013
मतलब से बनी यह दुनिया .....
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मतलब से बनी यह दुनिया मतलब तक ही सिमटी है ... कौन किसका यहाँ सब मतलब से ही मिलते है .... जब तक मतलब निभता है मुस्कुराते है गुनगु...
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Tuesday, 1 January 2013
एक आस
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कई साल न जाने कितने साल , ना कोई ख़त आया तुम्हारा ना उम्मीद ही टूटी मेरी ... हवा सी एक लहराई पुर्जा उड़ मेरे हाथ आया तुम्हारा लिखा ख...
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Friday, 28 December 2012
तुम्हारा साथ .....
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तुम्हारे साथ चला नहीं जाता नहीं सहन होती अब मुझसे तुम्हारी बेरुखी ....... ये बेरुखी मुझे लहुलुहान किये दे रही है , ...
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Friday, 21 December 2012
एक गृहिणी.......
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एक गृहिणी जब कलम उठाती है ... लिखती है वह खिलते फूलों पर उगते सूरज पर नन्ही किलकारियों पर मासूम मुस्कानों पर ... वह लिखती है ममता...
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