नयी उड़ान +
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Friday, 22 May 2015
एक चिराग मुहब्बत का ..
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एक चिराग मुहब्बत का जो जलाया था हमने, ना बुझ पाया दुनिया की नफरतों की आँधियों से ... हम मिले या ना मिलें कभी रहेगा जहाँ भी चिराग, ...
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Wednesday, 20 May 2015
कैसा है मानव जो बना है दानव..
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नभ है उदास क्यूँ , क्यूँ उदास है देवी -देवता , चुप हैं दीप बुझी क्यूं दीपमाला। सोचे हैं सभी क्या सोच के यह धरा बनाई , ध...
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Sunday, 17 May 2015
जिंदगी जैसे चौसर की बिसात ...
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जिंदगी जैसे चौसर की बिसात ! सभी के अपने -अपने खाने है अपनी -अपनी गोटियां है। इंतज़ार है तो पासों के गिर के बिखरने का। पासों के बि...
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Thursday, 7 May 2015
अब चाँद को छूने की हसरत नहीं...
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बचपन के आँगन में पानी भरी थाली में चाँद देखना जैसे आँगन में ही चाँद उतर आया हो नन्ही हथेलियों से चाँद को छूने की चेष्टा में पानी के...
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Tuesday, 5 May 2015
माँ हो गई है कुछ कमजोर...
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जीवन की सांध्य बेला में माँ हो गई है शरीर से कुछ कमजोर और याददाश्त से भी। उसे नहीं रहता अब कुछ भी याद , तभी तो वह भूल गई मेरी ...
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Thursday, 30 April 2015
स्त्री अडिग ही रही सदैव...
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स्त्री सदैव खड़ी कर दी जाती है सवालों के कटघरे में जवाब को उसके सफाई मान लिया जाता है तो खामोशी को उसका जुर्म... तीर जैसे सवालों क...
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Thursday, 16 April 2015
प्रेम बस तुम हमेशा ही कायम हो
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प्रेम तुम आशा हो मन की प्रिया हो तन-मन को जो बांधे वो एकता हो। प्रेम तुम नील -गगन की नीलिमा में हो मन की अपार शांति में हो। प्र...
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