नयी उड़ान +
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Friday, 31 August 2012
ए जिन्दगी
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जिन्दगी ...! आ अब मैं तुम्हे हारना चाहती हूँ तुमसे जीतना मुझे अब नामुमकिन ही लगता है ... कभी तुम्हे बुलाया तो चुप रहने को कहती हो , चु...
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Thursday, 30 August 2012
सिर्फ तुम .....
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कभी - कभी कोई, किसी के लिए दरवाज़े जब .स्वयं ही बंद कर देता है , तो वह अक्सर उसी की आहट का इंतजार क्यूँ करता है .... क्यूँ ...! ह...
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Thursday, 23 August 2012
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बेशक हम उनका मौन समझ लेते हैं .. अब उन्हें क्या मालूम .... हम भी तो उनको, सुनने को तरसते हैं ...
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Tuesday, 21 August 2012
मायका
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मायके से विदाई की बेला के साथ -साथ मन और आँखों का एक साथ भरना और एक -एक करके बिखरा सामान सहेजना ......... बिखरे सामान को सहेजते हुए हर ...
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Monday, 13 August 2012
स्वतंत्रता दिवस..
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मैं आज़ाद भारत की जनता बेबस ,लाचार, लुटी -पिटी , जानवरों की तरह रहने की आदी...... यह शब्द सुनने मुझे अच्छे नहीं लगते .... क्यूँ कि व...
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Friday, 10 August 2012
कान्हा, तुम अब धरा पर मत आना
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कान्हा , तुमने कहा था .... जब भी धर्म की हानि होगी , मैं इस धरा पर आऊंगा ... पर तुम हो कहाँ पर नज़र ही नहीं आते ........ अगर आग...
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Thursday, 9 August 2012
कभी -कभी खाली घर भी बोलने लग जाता है
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कभी -कभी खाली घर भी बोलने लग जाता है , सुन कर देखा है कभी ...! दरवाज़े ,दीवारें और बंद अलमारियां भी गुनगुनाने लग जाती है ........
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