नयी उड़ान +
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Tuesday, 7 June 2016
घर मेरा है बादलों के पार ....
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दिन-रात सुबह -शाम भोर -साँझ कुछ नहीं बदलते दोनों समय का नारंगीपना..... उजली दोपहर अँधेरी काली आधी रात हो सब चलता रहता है अनवरत...
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Sunday, 6 March 2016
खो गए हैं अब वो स्वप्निल से पल !
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सभी कुछ तो है अपनी - अपनी जगह , सूरज चाँद सितारे बादल ! फिर ! क्या खोया है ! हाँ ! कुछ तो खोया है। या सच में ही खो गया है ! ...
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Wednesday, 24 February 2016
क्यूंकि तुम रेत पर कदमों के निशां जो छोड़ जाते हो !
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समुन्दर से मन की लहरें भागती है क्यूँ बार -बार किनारे की तरफ ! तम्हें तलाशती है ! सच में ! या शायद उनको मालूम है तुम्हारा वहां ...
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Wednesday, 17 February 2016
कैसा ये खेल है सूत्रधार का ....
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रंगमंच सी दुनिया है , सूत्रधार की कल्पना से परे ! पुरुषों के दो सर हैं और स्त्रियां हैं यहाँ बिना सर की ! बेटे के पिता का सर ...
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Saturday, 13 February 2016
प्रेम की पराकाष्ठा है ...
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मन भागता है अनन्त की ओर अनदेखे -अनजाने पथ की ओर निर्वात की ओर ! देखता है प्राणों का देह से विलग होना और देखता है देह को विदेह ह...
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Wednesday, 3 February 2016
जब याद तुम्हें आऊं और तुम मुस्कुरा दो
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जब तुम्हारी याद ही बन कर रहना है तो क्यूँ ना मधुर याद ही बन कर रहूँ ..! जब याद तुम्हें आऊं और तुम मुस्कुरा दो फिर क्यूँ न ...
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Sunday, 24 January 2016
किसको सुनाइए दर्द अपना...
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बुझ गए रंगोलियों पर रखे दीप बिखर गए सारे रंग। अब बिखरी हैं मायूसियां दर्द कराहटें। किसको सुनाइए दर्द अपना, ...
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