नयी उड़ान +
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Wednesday, 24 February 2016
क्यूंकि तुम रेत पर कदमों के निशां जो छोड़ जाते हो !
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समुन्दर से मन की लहरें भागती है क्यूँ बार -बार किनारे की तरफ ! तम्हें तलाशती है ! सच में ! या शायद उनको मालूम है तुम्हारा वहां ...
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Wednesday, 17 February 2016
कैसा ये खेल है सूत्रधार का ....
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रंगमंच सी दुनिया है , सूत्रधार की कल्पना से परे ! पुरुषों के दो सर हैं और स्त्रियां हैं यहाँ बिना सर की ! बेटे के पिता का सर ...
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Saturday, 13 February 2016
प्रेम की पराकाष्ठा है ...
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मन भागता है अनन्त की ओर अनदेखे -अनजाने पथ की ओर निर्वात की ओर ! देखता है प्राणों का देह से विलग होना और देखता है देह को विदेह ह...
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Wednesday, 3 February 2016
जब याद तुम्हें आऊं और तुम मुस्कुरा दो
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जब तुम्हारी याद ही बन कर रहना है तो क्यूँ ना मधुर याद ही बन कर रहूँ ..! जब याद तुम्हें आऊं और तुम मुस्कुरा दो फिर क्यूँ न ...
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Sunday, 24 January 2016
किसको सुनाइए दर्द अपना...
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बुझ गए रंगोलियों पर रखे दीप बिखर गए सारे रंग। अब बिखरी हैं मायूसियां दर्द कराहटें। किसको सुनाइए दर्द अपना, ...
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Sunday, 17 January 2016
अब तुम मत आना..
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तपते सहरा में चली हूँ अकेली मैं, जब छाँव भरी बदली ढक ले मेरे राह को शीतल कर दे मेरी डगर, तब तुम मत आना। अमावस की अँधेरी ...
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Thursday, 7 January 2016
कहाँ और कब तक रहोगे तुम छुप कर
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ख़ामोशी पसर सी गई चहुँ ओर जैसे सागर किनारे की मिट्टी। लहरें भी लौट जाती हैं धीमे से छू कर बिना कुछ कहे। सूनापन नहीं है फिर भी तुम्...
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