नयी उड़ान +
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Friday, 30 October 2015
कहाँ खोजूँ तुम्हें ...
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तुम्हें सोचा तो सोचा, देखूं एक बार तुम्हें। लेकिन जाने कहाँ छुप गए हो तुम तो कहीं ! फिर देखूं तो कहाँ देखूं , कहाँ खोजूँ तुम्हे...
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Friday, 16 October 2015
मछलियाँ और स्त्रियां...
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मछलियाँ और स्त्रियां कितना साम्य है दोनों ही में ! मछलियाँ पानी में रहती है और पानी भरे रहती है आँखों में स्त्रियां ! बिन पानी छटप...
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Tuesday, 29 September 2015
स्त्री प्रेम में क्यों कर कुलटा कहलाई ..
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स्त्री ने लिखा विश्वास बेटी कहलाई। स्त्री ने लिखा स्नेह बहन कहलाई। स्त्री ने लिखा समर्पण पत्नी कहलाई। स्त्री ने लिखा ममता ...
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मैं धरती- पुत्र मंगल हूँ...
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मैं धरती- पुत्र मंगल हूँ और मानव, तुम भी तो धरती- पुत्र ही हो। फिर तो मेरा और तुम्हारा |, रक्त -सम्बन्ध ही हुआ ना। ...
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Friday, 25 September 2015
क्या अब भी असहाय है राजकुमारियाँ ..
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कैसी है अंधेर नगरी यह, भेड़िये घूमते हैं दिन -दिहाड़े यहाँ । सुना था कभी भेड़िये की मौत ही खींच लाती है उसे नगर की ओर । जमाना बदला ...
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Saturday, 19 September 2015
रुदाली
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रुदाली जिसे सिर्फ सुना, पढ़ा है कभी देखा नहीं ... कभी उसको सोचती हूँ, उतरती हुई पाती हूँ कहीं अपने भीतर ही। उसका रुदन, क्रंद...
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Thursday, 17 September 2015
बिखरे हुए अक्षर चुन कर...
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बिखरे हुए अक्षर चुन कर बना दिए जाते हैं मन चाहे शब्द ... मनचाहे शब्दों की कड़ी बुन देती है वाक्य की जंजीर... इस जंजीर में भरे ज...
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