नयी उड़ान +
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Monday, 20 November 2017
ਰੱਬ ਵਰਗੀ ਹੈ ਮਾਂ ਮੇਰੀ...( रब जैसी है माँ मेरी )
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ਧਰਤੀ ਮਾਂ ਵਰਗੀ ਹੈ ਮਾਂ ਮੇਰੀ। ਜਿਵੇਂ ਘੁੱਮਦੀ ਹੈ ਧਰਤੀ , ਆਪਣੀ ਹੀ ਧੁਰਿ ਤੇ। ਇੰਝ ਹੀ ਆਪਣੇ ਘਰ ਦੀ ਧੂਰੀ ਤੇ ਘੁੱਮਦੀ ਹੈ ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਵੀ। ਬੱਦਲਾਂ ਵ...
Monday, 6 November 2017
अब नहीं लौटेगा आहत मन..
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चले ही जाते हैं जाने वाले एक-न -एक दिन , दामन छुड़ा कर। क्या जाने वो , कोई ढूंढता है उसे , दर-दर , भटकता है दर-ब -दर। क्यों सोच...
Tuesday, 24 October 2017
भटकती है वह यूँ ही कस्तूरी मृग सी
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वजूद स्त्रियों का खण्ड -खण्ड बिखरा-बिखरा सा। मायके के देश से , ससुराल के परदेश में एक सरहद से दूसरी सरहद तक। कितनी ...
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Friday, 8 September 2017
यह जिंदगी
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यह जिन्दगी, बंधी है , सम्भाली सी एक नियत दायरे में , या खुल कर बिखरने को आतुर है । चुप रहें , बात करें , हंसे या ...
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Saturday, 2 September 2017
शायद एक जैसी ही है
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झोंपड़ी में जन्मे बच्चे और नाली के पास खिले फूल की तकदीर , शायद एक जैसी ही है .... दोनों का जन्म बस यूँ ही हो जाता है बिना कि...
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Monday, 14 August 2017
इन चुप्पियों के समन्दरों में...
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चुप है हवाएँ , चुप है धरती , चुप ही है आसमान , और चुप से हैं उड़ाने भरते पंछी... पसरी है दूर तलक चुप्पियाँ। इन घुटन भरी चुप्पिय...
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Wednesday, 8 March 2017
एक दिन
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एक दिन थम गई थी घूमते-घूमते जब धरा, उस दिन रुक गई थी सहसा ही चलते-चलते जब हवा, उसी दिन ही सिमटा सा लगा दूर तक फैला , आसमां.. ऐस...
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