Friday, 9 August 2013

सूरजमुखी सी मैं .......

सूरजमुखी सी मैं
सूरजमुखी सी मैं ,
तुम हो जैसे मेरे
 सूरज। 
तुम्हारा साथ ही मेरा 
जीवन  …!

भोर से संध्या तक 
सभी रूप  तुम्हारे 
लुभाते मुझे 
भोर मैं मासूम  सा ,
दोपहर सा  प्रचंड रूप 
 खींचता मुझे  ,
संध्या को शांत -क्लांत रूप  …. 

भाता  है मुझे 
तुम्हारे नयनो में नयन 
उलझा देना 
और तुम्हारा मुस्कुरा देना  …… 

तुम बिन मेरा क्या
 अस्तित्व 
तुम से ही तो मेरा जीवन 
तुमसे ही मिलती  प्राण वायु ,
तुम्ही तो हो मेरे सूरज 
और 
 सूरजमुखी सी मैं 
चलती हूँ तुम्हारे साथ -साथ  ……. 






6 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर मार्मिक … अभिव्यक्ति बहना …

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  2. बहुत खुबसूरत रचना..

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  3. बहुत सुन्दर

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