Monday, 30 July 2012

भाई


जब भी रक्षा -बंधन
पास आता जाता है
मन भीगा सा ,
भारी सा होता
जाता है ......
राखी के बाज़ार
में आवाजें
कानो को नहीं
दिल को लगती है .......
बहने कितनी प्यार से राखी
लेती है ,
देख कर उनके लिए
ख़ुशी और अपने लिए
हसरत सी मन में
भर जाती है ....और
मैं भी भरी
आँखों ,प्यार भरे
दिल से दो राखी
ले लेती हूँ ...अच्छी
सी ,महँगी सी .....
मेरे भी दो भाई है
बड़े शिव जी ;
छोटे हनुमान जी ,
जिन्हें हमेशा अपने
पीछे खड़ा पाती हूँ ....
मेरी एक पुकार पर
भागे चले आते है ..
ऐसे भाई है
किसी के ,जैसे
मेरे है.........

Saturday, 28 July 2012

सुनो ...!!


सुनो ...!!
एक बार चले आओ ,
जरा एक बार सिर्फ एक बार
मुड़ के तो देखो ....
मैं अभी भी तुम्हारी राह ताक
रही हूँ ,
अपनी पलकें बिछाए .........
तुम्हारे बिन सूना-सूना है  सब,
जीने का अर्थ ही क्या रह जायेगा
तुम बिन ,मेरा ........
लेकिन ,प्रिय ...!!
ये तो मैंने कहा ही नहीं तुमसे
फिर क्यूँ तुम मुड़ के मेरी
बेचारगी की प्रतीक्षा कर रहे हो .....
जाओ तुम्हारा पथ ,
तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है ,
अगर तुम सूरज को साथ ले कर
चलते हो ,
तो मेरे पास भी
एक छोटा सा दीपक है , जो
मुझे मेरी मंजिल तक
राह दिखलायेगा .............

Tuesday, 24 July 2012

हमारा प्रेम


हमारा प्रेम
मुझे पानी के बुलबुले
जैसा ही लगता है ........
ऐसा जैसे थोड़ी सी ठेस लगी
और गुम........
इसलिए मैंने इसे एक छोटी सी
 कांच की पटारी में छुपा कर ,
सहेज कर  रख दिया  है ......
जब - तब तुम्हें देखने का मन
करता है ....
ये पटारी खोल लेती हूँ और इसमें ,
तुम्हारे साथ -साथ
सारा जहाँ नज़र आता है ........
चल पड़ती हूँ
तुम्हारा हाथ थाम .............
पर कभी डर भी लगता है क्या वो
दिन भी आ जायेगा कभी
ये पटारी खोलूंगी और
आस-पास की गरम हवाएं
इसे उड़ा ही ना ले जाये .....
इसे खोलने से पहले
मैं , उन गरम हवाओं को
अपने आंसुओं से नम किये
रखती हूँ ..........

Sunday, 22 July 2012

तुम्हारा मौन ......


मैंने जब भी तुमको पुकारा
 तुम मौन तो नहीं रहे कभी .....
पर आज मेरे पुकारने पर तुम ,
मौन ही रहे .....
 तुम्हारा मौन रहना मुझे
अखर गया ,
पर
तुमसे ज्यादा तो तुम्हारा
मौन ही मुखर
हो कर बोलता रहा .......
और
मैं सुनती रही पलकें नम
किये .....
तुम्हारे जाने के बाद
खुद को
तुम्हारे मौन ,
और तुम्हारे अहसास से
ही घिरा पाया ...........

Thursday, 19 July 2012

जिन्दगी की किताब


आओ आज फिर से
जिन्दगी की  किताब  लिखें ...
सुंदर से सुनहरे -रुपहले पन्नो
से सजी जिन्दगी की किताब के पन्ने,
 अब उलझनों की सिलवटों
से मुरझायेगे नहीं .....
ना ही आंसुओं से गीले हो कर अपना
रूप बिगाड़ेंगे....
ना ही कहीं यादों के सूखे गुलाब ही
 मिलेंगे किसी पन्ने के बीच में ....
ये किताब ही गुलाबों की तरह
 महकेगी अब तो  ........
अब किसी याद की टीस बयां करता
कोई कोना मुड़ा हुआ नहीं मिलेगा ......
हर पन्ना आज को ही बयान करेगा ,
बीते कल की कोई बात नहीं होगी ......
मटमैले -धूसर रंगों की अब यहाँ कोई
जरूरत नहीं है ....
एक आसमानी रंग जो आँखों में सपने
की तरह पलता रहा है उसी पर
सभी सपनो को सच करती ,
जिन्दगी की किताब फिर से लिखेंगे .....

Sunday, 8 July 2012

उसकी चाहत

जब से उसने कहा ,
वो मेरे लबों पर हंसी 
ही देखना चाहता है ......
तब से लब तो मुस्कुराते है 
पर नयन अभी भी छलक
जाते है ..........

हमने .......



तुझे दूर से 

देख कर ही 

जी लिया हमने 


तुझे तो क्या 


तेरी तस्वीर को भी नहीं 

छुआ हमने ...

दूर से ही चाहते 


 रहे तुझको 

करीब आ कर 


तुझे खोना

 कभी नहीं चाहा हमने ...

ये बदली -बदली तस्वीर तुम्हारी........

ये बदली -बदली तस्वीर
तुम्हारी, मुझे खूब भाती है 
मुख पर खिली -खिली मुस्कान ,
आँखों मे चमक एक विश्वास की,
के अब पीछे मुड़ कर नहीं देखना .......
खुली खिडकियों से महकी हवा में
सांस लेने लगी हो ,.......
धुंए के बहाने अपने आंसू और
अरमानो को अब कहाँ बहने देती हो ,
तुम्हारा, आँखों में आत्मविश्ववास की चमक
और मुस्कान को लिए ,बहारों को अपने
बस में लिए चलना मुझे खूब भाता है ........

Thursday, 5 July 2012

गांधारी

गांधारी ,आँखों से बंधी पट्टी अब तो उतार दो 
कब तक सच्चाई से आँखे बंद रखोगी ,
कितनी सदियाँ बीत गयी यूँ आँखे बंद किये 
क्या तुम्हे दुनिया का उजाला पसंद नहीं ........
मुझे तुमसे यह शिकायत तो हमेशा ही रहेगी ,
के तुमने आँखों के साथ-साथ ,
अपने विवेक पर भी पट्टी बांधी थी .......
एक नेत्रहीन का मार्ग-दर्शन करने के बजाय
तुमे अपनी ही आँखे बंद करली .........
क्या तुमने एक सच्ची सहचरी होने का निबाह किया ,
क्या एक माँ होने का कर्तव्य -पालन किया ........
तुमने बेशक एक पत्नी का ये कर्तव्य जाना हो
पर मैं सोचती हूँ के पति को सही राह दिखाना भी
तो तुम्हारा कर्तव्य था ...
तुम नेत्रहीन हो गयी और तुम नेत्रहीन हो गयी और

 तुम्हारी संतान 
दिशाहीन हो गई........
तुम्हारी ये पट्टी अभी भी 
नहीं खुली तो तुम्हारी संतति 
यूँ ही दिशाहीन होती जाएगी ..................

एक उम्मीद का दीया

मुहब्बत का तो हमें मालूम नहीं ,

नफरत तो ना  कर सके तुझसे ........


एक उम्मीद का दीया अब भी ,


जला कर बैठे है तुझे मालूम नहीं ...........