Thursday, 21 June 2012

एक अटल फैसला ( ? )

हर सुबह एक फैसला ले कर उठती हूँ 
एक अटल फैसला ले कर 
बिलकुल "अटल जी" की तरह 
आर या पार की लड़ाई का फैसला 
आखिर मेरे भी तो हाथ-पैर है 
मैं भी चला सकती हूँ , फिर क्यूँ
रोज़ -रोज़ का ये सहन करना ..
बस आज बात कर ही लूंगी उससे
फिर जो भी होगा देखा जायेगा .......
पर मेरी सारी आर -पार की लड़ाई
कहीं गुम हो जाती है
दिल में ख़ुशी सी भर जाती और होठों
पर राहत भरी मुस्कान .....
जब भरी गर्मी में, बरसात की "बदली" सी ,
काले मेघों सी छवि में श्वेत- धवल दन्त
पंक्ति चमकती है ...
बीबी जी ,आज फिर देर हो गयी ...
और मैं उसकी राम कहानी से बचने के
लिए .बोल पड़ती हूँ 

अरी , बहुत गर्मी है ,जरा ठंडा पानी पी ले ...

Wednesday, 20 June 2012

एक दिन


एक आसमां जो एक दिन 
धरती से मिला, 
क्षितिज से ना जुड़ सका ....
और एक आसमां जो धरती
से जुदा हुआ ,
क्षितिज से ना जुदा हो सका ...

Tuesday, 12 June 2012

बस यूँ ही .......

गम का जहर बस
यूँ ही पिया हमने ..........
रहे साथ-साथ चलते
रेल की पटरी की तरह 
ना तुमने पुकारा हमें ,
ना आवाज़ लगाई कभी हमने .....
ना तुमने हाथ बढाया कभी ,
ना हम ही करीब आये तुम्हारे .......,
ना तुम्हारी खता है,ना मेरी ही ,
बस यूँ ही बे -रंग सा जीवन
जिया हमने ........